Biography of hazrat mahal in hindi




  • Biography of hazrat mahal in hindi
  • [MEMRES-5]...

    बेगम हज़रत महल

    वेअवध की बेगम' के नाम से भी प्रसिद्ध थीं, अवध के नवाब वाजिद अली शाह की दूसरी पत्नी थीं। अंग्रेज़ों द्वारा कलकत्ते में अपने शौहर के निर्वासन के बाद उन्होंने लखनऊ पर कब्ज़ा कर लिया और अपनी अवध रियासत की हुकूमत को बरकरार रखा। अंग्रेज़ों के कब्ज़े से अपनी रियासत बचाने के लिए उन्होंने अपने बेटे नवाबज़ादे बिरजिस क़द्र को अवध का वली (शासक) नियुक्त करने की कोशिश की थी; मगर उनका शासन जल्द ही खत्म होने की वजह से उनकी यह कोशिश असफल रह गई। उन्होंने 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह किया। अंततः उन्हें नेपाल में शरण मिली जहाँ उनकी मृत्यु 1879 में हुई थी।[1]

    जीवनी

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    बेगम हज़रत महल का नाम मुहम्मदी खानुम था, और उनका जन्म फ़ैज़ाबाद, अवध में हुआ था। वह पेशे से एक तवायफ़ थी और अपने माता-पिता द्वारा बेचे जाने के बाद में ख़्वासीन के रूप में शाही हरम में ले लिया गया था। तब उन्हें शाही अधिकारियों के पास बेचा गया था, और बाद में वे 'परी' के तौर पर पदोन्नत हुईं,[2] और उन्हें 'महक परी' के नाम से जाना जाता था।